| ब्यौरे |
विवरण |
क्षेत्रफल |
10,491.69 वर्ग कि.मी. |
जनसंख्या |
36,71,032 * |
राजधानी |
अगरतला |
मुख्य भाषाएं |
बांग्ला और काकबरक |
त्रिपुरा के बारे में
त्रिपुरा पूर्वोत्तर में स्थित भारतीय राज्य है, जिसकी सीमाएं मिजोरम,
असम तथा बांग्लादेश से लगी हुई हैं। उत्तर, दक्षिण तथा पश्चिम में यह
बांग्लादेश से घिरा है तथा इसके कुल सीमा क्षेत्र का 84 फीसदी यानी 856
किलोमीटर क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में है। असम के साथ इसकी सीमा
की लंबाई 53 किलोमीटर है तथा मिजोरम के साथ यह 109 किलोमीटर लंबी है। यह
राज्य राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के माध्यम से पूरे देश से जुड़ा हआ है। यह
राजमार्ग असम के करीमगंज जिले की पहाडियों के बीच में से होता हुआ गुजरात
है तथा मेघालय, असम, उत्तर बंगाल से होते हुए कोलकाता तक जाता है।
| ब्यौरे |
विवरण |
| अन्य भाषा |
अंग्रेजी, हिंदी, मणिपुरी, चकमा |
| ऊंचाई |
12.80 मीटर |
| तापमान |
ग्रीष्म ऋतु : 20 से 36 डिग्री सेल्सियस
शीत ऋतु : 7 से 27 डिग्री सेल्सियस (माइनस में 2 डिग्री सेल्सियस तक भी जाता है) |
| वर्षा ऋतु |
जून से अगस्त |
| औसत वर्षा |
2500 मिलीमीटर प्रति वर्ष |
| अंतरराष्ट्रीय सीमा |
856 किलोमीटर |
| साक्षरता दर |
73.66% (2001 की जनगणना पर आधारित) |
15 अक्टूबर 1949 में जब त्रिपुरा का विलय भारतीय संघ में किया गया था,
उस समय राज्य में झूम खेती चलन में थी। इससे होने वाला उत्पादन संतोषजनक
कहा जा सकता था। राज्य में समतल भूमि का प्रतिशत अत्यंत कम है और उस पर
बंगाली खेती करते हैं। यहां की मुख्य पैदावार चावल है। अधिकांश समतल भूमि
दलदली होने अथवा केन की पैदावार की वजह से कृषि पैदावार के लिए उपयोगी नहीं
है। राज्य के अस्तित्व में आते समय यहां की अर्थव्यवस्था कृषि तथा वनों पर
आधारित थी। राज्य में औद्योगीकरण नहीं था तथा शहरीकरण भी सीमित अधोसंरचना
के साथ था।
कभी एक जिला रहे त्रिपुरा को प्रशासकीय रूप से मजबूती देने के लिए
वर्तमान में चार जिलों, सत्रह उपखंडो तथा चालीस ग्रामीण विकास खंडों के रूप
में शक्ति प्रदान की गई है। संविधान की 6वीं अनुसूचित के आधार पर त्रिपुरा
को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है। जिससे इसे स्वायत्त जिला परिषद की
शक्तियां प्राप्त हुई हैं। स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) के पास राज्य के
कुल भौगोलिक क्षेत्र का 68.10% है। यह क्षेत्र राज्य की कुल जनसंख्या का एक
तिहाई है।
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