नागपुर शहर में एक
दयालु व्यापारी देवेन्द्रनाथ जी रहते थे | शहर में उनकी कपडे की मिले थी, सभी
प्रकार से सुख समृद्धि थी | अचानक एक-एक कर सभी मिल में मजदूरों ने हड़ताल कर दी |
सेठजी का मन बहुत द्रवित हुआ मामला गंभीर था व नेताओ के दबाव की वजह से मिले शुरू
होने के आसार नहीं दिख रहे थे |
ऐसे समय में सेठ जी
से उनके एक दूर के रिश्तेदार का उनसे मिलने आना हुआ | बातों-बातों में सेठजी ने
उसे अपनी समस्या बताई | उस रिश्तेदार ने निश्चिन्ततापूर्वक कहा कि घबराने की कोई
बात नहीं है, सब कुछ ठीक हो जाएगा | उसने गुरुवार वाला “श्री साईबाबा व्रत” करने
को कहा | उसने कहा- आप और सेठानी दोनों एक साथ यह व्रत रखें, बाबा की कृपा से सब
मंगल होगा | सेठ-सेठानी ने विधि-पूर्वक गुरुवार का व्रत आरम्भ हुआ और व्रत आरम्भ
करने के दो सप्ताह के भीतर सभी मिलें पुनः चालू हो गई | साईं बाबा की कृपा से क़र्ज़
में डूबे देवेन्द्रनाथ जी का एक वर्ष में ही पर्याप्त लाभ हो गया | परिवार में
सुख-शांति मिली | इसका सारा श्रेय सेठजी ने ‘श्री साईबाबा व्रत’ को दिया |
ऐसी है ‘श्री साईबाबा व्रत’ की महिमा |
|| अनन्त कोटि ब्रह्मांड नायक राजाधिराज योगिराज
परब्रम्ह
श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईंनाथ महराज की जय ||
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