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Friday, 14 June 2013

अनोखा ठग


एक शहर में एक स्त्री रहती थी | काम उम्र में ही उसका पति मर गया था | इसीलिए उस स्त्री ने दूसरा विवाह कर लिया था | उसका दूसरा पति बहुत पैसे वाला था तथा खेती करता था |
एक दिन पति-पत्नी खेत में काम कर रहे थे | कड़ी दोपहर थी | पति ने कहा, “थोडा विश्राम कर लो | मैं घोड़े को नहर से पानी पिलाकर लता हूँ | तब तक तुम विश्राम करो |”


पत्नी पेड़ के नीचे विश्राम करने लगी और पति घोड़े को पानी पिलाने चला गया | इतने में पत्नी को उसके पास आता हुआ एक आदमी दिखाई दिया | वह आदमी विचित्र कपडे पहने बालो वाला टोपी लगाये हुए था |

स्त्री ने उस आदमी से पूछा, “तुम कौन हो ? कहा से आये हो ?” आदमी ने उत्तर दिया, “मैं इस दुनिया का नहीं हूँ |”
स्त्री ने पूछा, “तुम दूसरी दुनिया के हो तो क्या तुम्हे वहा मेरा पहला पति लखन मिला ?”

आदमी ने कहा, “ अरे लखन को कौन नहीं जानता ? हम दोनों बहुत अच्छे मित्र है और हम दोनों के घर भी पास-पास हैं |”
स्त्री ने पूछा, “वहां वह आराम से तो है, कोई तकलीफ तो नहीं है ?” आदमी ने जवाब दिया, “हाँ आराम से तो है परन्तु वहां पैसे की बहुत तंगी रहती है | कभी चाय पीने या कुछ खाने की इच्छा हुई, तो उसके पास पैसे ही नहीं होते हैं | अगर मैं उसे कुछ देता हूँ तो वह लेने में भी संकोच करता है |”

स्त्री के आँखों में आंसू आ गए | उसने आंसू पोछ्ते हुए कहा, “अगर तुम वापिस जा रहे हो तो मुझसे कुछ पैसे ले जाना और लखन को दे देना |”

आदमी ने कहा, “ठीक है, मैं उसे पैसे दे दूंगा |”
स्त्री ने कोट से कुछ पैसे निकाले और आदमी को दे दिए और कहा, “तुम लखन से कहना कि मैंने दूसरी शादी कर ली है परन्तु उसे भूली नहीं हूँ |”

आदमी पैसे लेकर चला गया | वह स्त्री उस आदमी को तब तक देखता रहा जब तक वह दिखाई दिया | इतने में उसका पति घोड़े को पानी पिलाकर लौट आया और उसने पत्नी से पूछा, “वह आदमी कौन था ?

पत्नी ने जो कुछ भी हुआ, किसान को बताया | उसे पत्नी पर बहुत गुस्सा आया | तुरंत ही उसने उस आदमी को पकड़ने के लिए चल दिया |

उस आदमी ने किसान को अपनी ओर आते हुए देखा तो एक पनचक्की में घुस गया और पनचक्की मालिक से बोला, “तुम्हे मारने के लिए एक आदमी आ रहा है, फ़ौरन भाग जाओ |

जब मालिक ने बाहर देखा तो सचमुच एक आदमी उसकी पनचक्की की तरफ आ रहा था इसीलिए उसने तुरंत ही अपने कपडे उस आदमी से बदले और पनचक्की के पीछे से भाग गया |
किसान ने आदमी का चेहरा तो नहीं देखा था इसीलिए उस आदमी को पहचान न सका | उसने उससे पूछा, “इस तरफ एक आदमी आया था, वह कहा है ?

आदमी ने चक्की के पीछे दरवाजे की तरफ इशारा किया और कहा, “वहाँ से भागा है |”

जब किसान दरवाजे के पास गया, तो उसे एक आदमी भागता हुआ दिखाई दिया | उस जगह घोडा ले जाना मुश्किल था अतः वह घोडा वही छोड़ कर उसका पीछा करने लगा |

यह सुनकर चक्की का मालिक और तेजी से भागने लगा और हडबड़ाहट में उसका पैर फिसल गया और वह गिर गया |
किसान ने उसे पकड़ लिया और कहा, “मेरे पैसों की थैली कहा है ? यदि तुमने वापस नहीं कि तो मैं तुम्हे मार डालूँगा |”

मालिक ने पूछा, “कौन-सी पैसों की थैली ? मेरे पास तो कोई भी थैली नहीं है |”

किसान ने कहा, “झूठ मत बोलो | तुमने मेरी पत्नी को धोखा देकर, यह कहकर, कि पैसों की थैली उसके पति लखन को दोगे, ले आये थे, तुरंत वापस कर दो |”

चक्की के मालिक ने कहा, “तुम्हारी पत्नी कौन है ? लखन कौन है ? मैं कुछ भी नहीं जानता | मैं अपनी चक्की पर काम कर रहा था तो एक आदमी ने मुझे डराया कि तुम मुझे मारने आ रहे हो, इसीलिए मैं वहा से भगा |”

दोनों को जब सच्चाई मालूम हो गई तो वो वापस चक्की पर आये परन्तु चक्की पर न तो वह आदमी था और न ही किसान का घोडा |
वह आदमी घोडा लेकर भाग गया था | किसान को पैदल ही आना पड़ा | जब पत्नी ने उसे पैदल आते हुए देखा तो पूछा, “कहाँ चले गए थे ? खाना भी नहीं खाया और तुम्हारा घोड़ा कहा गया ?”
पति ने कहा, “स्वर्ग में बेचारा लखन पैदल ही इधर-उधर जाया करता था अतः मैं उसे घोड़ा भी दे आया, जिससे उसे कोई तकलीफ न हो |”

यह कहकर दोनों खाना खाने बैठ गए क्योंकि दोनों बहुत भूखे थे |

2 comments:

  1. यह कहानी वाकई लाजवाब हैँ । इसकी बराबरी अन्य कथाऐ नहीँ कर सकते हैँ , क्योकि यह कहानी वास्तव अच्छी हैँ । . . . नाम गुलशन देशमुख

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